अन्य लेख

सामाजिक सेवा के गति अवरोधक

नीति शतक में कहा गया है कि सेवा रूपी धर्म श्रेष्ठतम आभूषण है जो योगियों की बुध्दि से भी परे हैं। सामाजिक संगठन में सेवा और समर्पण के भावों का सर्वोच्च स्थान होता है। सामाजिक संगठन कई व्यक्तियों के समूह से अस्तित्व में आता है। सामाजिक संगठन के उद्देश्यों तथा …

Read More »

18 वी सदी के औदीच्य साहित्यकार – ‘‘श्री लल्लूलाल जी‘‘  

– प्रकाश दुबे (41 विद्यानगर उज्जैन) पन्द्रहवी, सोलहवी सदी में गुजरात से विभिन्न समूहों में पलायित सहस्त्र औदीच्य, उत्तर, उत्तर पश्चिम दिशा में राजस्थान,मालवा के साथ पंजाब,उत्तर प्रदेश के शहर मथुरा,आगरा, अलीगढ ,फर्रूखाबाद,बनारस आदि शहरों में जाकर बस गये । ऐसा ही एक पंडित परिवार पुरोहित चैनसुख का आगरा में …

Read More »

सास सुशील और बहु बदनाम क्यों ?

saas-bahu

सास और बहू की जन्म कुण्डली मिलान करने की जनचर्चा होती है किन्तु आज तक कभी दोनों की कुण्डली को किसी ने मिलाया नहीं ? क्योंकि सास बहु संवाद तो बेटे की शादी के बाद ही प्रारम्भ होता है । पहले तो बहु सर्वगुण सम्पन्न नजर आती है। शादी के …

Read More »

परिचय से परिणय तक .गागर में सागर का समायोजन

parichay

विचार वैश्विक संपत्ति हैए जो उन्हे ग्राह्य करता हैए उसके व्दारा ही वे अभिव्यक्त होते हैं ! संस्कारों के विषय में भी आदिकाल से  निरन्तर विचार मंथन चलता आया है! संस्कारों के पीछे हमारे ऋषि मुनियों का उद्देश्य था एक प्रतिभा संपन्नएविवेकशील और श्रध्दालु मानव का निर्माण करनाए किन्तु पश्चिम …

Read More »

मुस्कराईए

smile

एल्बर्ड हब्बर्ड की नेक सलाह है  मन पर संकल्प का बहुत बडा प्रभाव पडता है। आदमी  जैसा संकल्प लेता  है, वह पूरा होता है। मुस्कराहट से इस संसार  को खुशहाल बनाया जा सकता है। शब्दों के बजाय मुस्कराहट का ज्यादा प्रभाव पडता है। एक चीनी कहावत हैः- ‘‘ जिसके मुख …

Read More »