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अठारहवाँ परिचय सम्मेलन

परिचय सम्मेलन का शाब्दिक अर्थ है परिचय के लिए मिलन स्थल। आज वर्तमान समय में मिलने का ही समय किसी के पास नही है। सब जीवन की आपाधापी में इतने फसे हुए है की अपने बच्चों के विवाह सम्बन्ध हेतु योग्य वर वधु के चयन की समस्या होने लगी है। …

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जीवन साथी का चयन

विवाह उसी से होता है जिसे जीवन साथी के रूप में वर और वधु पक्ष की स्‍वीक्रति और सहमति मिल जाती है किन्‍तु विवाह से पूर्व जीवन साथी का चयन ही सबसे अहम कार्य होता है। हजारों में से एक को चुनना यह चयन करने वाले की काबलियत पर निर्भर …

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नाम में सब कुछ रखा है ?      

बात बात में लोगों के मुह से निकलता है कि ‘‘नाम में क्या रखा है,काम से मतलब रखो। नाम की अपनी सार्थकता,उपयोगिता और प्रांसगिकता है। जब हम किसी से परिचय करते हैं तो कहते हैं-‘‘ आपका शुभ नाम ’’, आपकी तारीफ’’ , ‘‘युअर गुड नेम प्लीज‘‘। नाम को मुहावरों के …

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नो उल्लू बनाविंग

बडे जोर शोर से धूम मचा रहा है एक स्लोगन ‘‘ नो उल्लू बनाविंग‘‘, क्यों कि हम सब एक दूसरे को कहीं न कहीं उल्लू बनने/बनाने में लगे है । ऋग्वेद में विवाह को यज्ञ माना जाकर उसका प्रधान कार्य संतानोत्पति माना गया है । पुरूष  को बीज और नारी …

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कन्या और कार/हाथी बंधा व्दार

पुत्री परिवार की पावनता,कन्या कलियों की मुस्कान,और बेटी बचपन का संस्कार जैसे अलंकरणों से युक्त है । बेटी माँ की गोद से लेकर गोदावरी के किनारों तक अठखेलियाँ करते हुवे पुष्पित,पल्लवित हा,े कन्या का रूप ग्रहण कर लेती है । इसी बेटी पुत्री, कन्या को कवियों,साहित्यकारों,कथाकारों, सन्तो, महन्तों ने मासूम …

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