परिचय सम्मेलन 2015

स्वजातीय बंधुओ,

परिचय सम्मेलन का शाब्दिक अर्थ है परिचय के लिए मिलन स्थल। आज वर्तमान समय में मिलने का ही समय किसी के पास नही है। सब जीवन की आपाधापी में इतने फसे हुए है की अपने बच्चों के विवाह सम्बन्ध हेतु योग्य वर वधु के चयन की समस्या होने लगी है। कितनी जगह कितने तरह के लोगो से मुलाकात, जानकारी एकत्रित करना बड़ा कठिन काम होता जा रहा है। ऐसे समय में परिचय सम्मेलन का आयोजन वास्तव में सम्बन्ध बनाने में योग्य वर वधु के तलाश करने में सार्थक होते जा रहे है।

समाज में योग्य युवक युवतियो की कमी नही है केवल तलाश करने की आवश्यकता है, इस तलाश को पूरा करने का काम परिचय सम्मेलन में हो सकता है। एक परिसर में सभी तरह की योग्यता वाले युवक युवतियां एकत्रित हो और हमे चयन की सुविधा मिले इससे ज्यादा क्या चाहिए। समाज में योग्यता की कमी नही है हमे अन्यत्र जाने की आवश्यकता नही है। हमारी पूर्ति समाज के अंदर ही हो सकती है केवल श्रद्धा और विश्वास के साथ चयन करने की प्रक्रिया करने की आवश्यकता है।

परिचय सम्मेलन शुरु करने का श्रेय औदिच्य ब्राह्मण समाज को ही है, हमने ही परिचय सम्मेलनों की श्रृंखला प्रारम्भ की जो आज सम्पूर्ण समाजो में सार्थक हो गई । परिचय सम्मेलन के माध्यम से किये गए सम्बन्ध आज सफल होते जा रहे है, इसलिए वर्तमान समय में परिचय सम्मेलन सार्थक है,उपयोगी है और समय की आवश्यकता है। परिचय सम्मेलन भविष्य में भी उपयुक्त और सार्थक रहेगे ।

परिचय सम्मेलनों में मिलने का, समझने का, चयन करने का पूरा अवसर मिलता है और आपके समक्ष कई विकल्प रहते है अतः चयन आसानी से हो जाता है। परिचय सम्मेलन जीवन साथी के चयन करने का सशक्त और सही अवसर होता है, जहा हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से हो सकती है।

सामाजिक ढांचे को जीवित रखने के लिए परिचय सम्मेलन और इस माध्यम से समाज के अंदर योग्यता का चयन व्यवहारिक और हर तरह से सही है। परिचय सम्मेलन का उद्देश्य भी यही होता है की योग्यता का चयन हो सके जिससे जीवन की सार्थकता भी बनी रहे ।

यही परिचय सम्मेलन की उपयोगिता है।