Uddhav Joshi

उद्धव जोशी - एफ 5/20 एलआयजी ऋषिनगर उज्जैन -uddhavjoshi1946@gmail.com

 मन को कैसे मनावें

आम धारणा है कि मन मानता ही नहीं है? मन इतना बेलगाम क्यों है? मन को कैसे मनायें? मन को वश में करने के लिये हजारो किताबी नुस्खे बाजार मे उपलब्ध है । अध्यात्म,योग,मनोविज्ञान, शास्त्र आदि के विव्दानों एवं विशेषज्ञों ने भी मन को मनाने के कईं सरल उपाय खोजे हैं …

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सामाजिक सेवा के गति अवरोधक

नीति शतक में कहा गया है कि सेवा रूपी धर्म श्रेष्ठतम आभूषण है जो योगियों की बुध्दि से भी परे हैं। सामाजिक संगठन में सेवा और समर्पण के भावों का सर्वोच्च स्थान होता है। सामाजिक संगठन कई व्यक्तियों के समूह से अस्तित्व में आता है। सामाजिक संगठन के उद्देश्यों तथा …

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18 वी सदी के औदीच्य साहित्यकार – ‘‘श्री लल्लूलाल जी‘‘  

– प्रकाश दुबे (41 विद्यानगर उज्जैन) पन्द्रहवी, सोलहवी सदी में गुजरात से विभिन्न समूहों में पलायित सहस्त्र औदीच्य, उत्तर, उत्तर पश्चिम दिशा में राजस्थान,मालवा के साथ पंजाब,उत्तर प्रदेश के शहर मथुरा,आगरा, अलीगढ ,फर्रूखाबाद,बनारस आदि शहरों में जाकर बस गये । ऐसा ही एक पंडित परिवार पुरोहित चैनसुख का आगरा में …

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सास सुशील और बहु बदनाम क्यों ?

सास और बहू की जन्म कुण्डली मिलान करने की जनचर्चा होती है किन्तु आज तक कभी दोनों की कुण्डली को किसी ने मिलाया नहीं ? क्योंकि सास बहु संवाद तो बेटे की शादी के बाद ही प्रारम्भ होता है । पहले तो बहु सर्वगुण सम्पन्न नजर आती है। शादी के …

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परिचय से परिणय तक .गागर में सागर का समायोजन

विचार वैश्विक संपत्ति हैए जो उन्हे ग्राह्य करता हैए उसके व्दारा ही वे अभिव्यक्त होते हैं ! संस्कारों के विषय में भी आदिकाल से  निरन्तर विचार मंथन चलता आया है! संस्कारों के पीछे हमारे ऋषि मुनियों का उद्देश्य था एक प्रतिभा संपन्नएविवेकशील और श्रध्दालु मानव का निर्माण करनाए किन्तु पश्चिम …

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