औदीच्य गौरव

श्रीस्थल प्रकाश किंबा उदीच्य प्रकाश – औदीच्यों का इतिहास ग्रन्थ.

         श्रीस्थल प्रकाश किंवा (अथवा) उदीच्य प्रकाश जैसा की नाम से जाना जा सकता है, श्रीस्थल अर्थात सिद्धपुर में प्रकाशित होने वाले, उत्तर भारत से आए (उदीची) ब्राह्मणो का संस्कृत वर्णित इतिहास गाथा है। पौराणिक शैली में गुरु- शिष्य संबाद के रूप में दो खंडो में लिखा गया …

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दुष्कर स्थानों पर खोजा- ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – पंचम भाग

दुष्कर स्थानों पर खोजा- ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – पंचम भाग    मैं स्वामी दयानन्द सरस्वती संक्षेप से अपना जन्म चरित्र लिखता हूँ।।      1913 वि. अगले पाँच मास में कानपुर व प्रयाग के मध्यवर्ती अनेक प्रसिद्ध स्थान मैंने देखे।  भाद्रपद के प्रारम्भ में मिर्जापुर पहुँचा।  वहाँ एक …

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आत्मा की खोज के लये शव का परिक्षण किया- ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – चतुर्थ भाग

आत्मा की खोज के लये शव का परिक्षण किया-  ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – चतुर्थ भाग   मैं स्वामी दयानन्द सरस्वती संक्षेप से अपना जन्म चरित्र लिखता हूँ।। कई वनों और पर्वतों से होता हुआ चिलका घाटी से उतर कर मैं अन्ततः रामपुर [‘रामनगर’] पहुँच गया।  वहाँ पहुँच कर …

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सत्य की खोज में- ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – तृतीय भाग

सत्य की खोज में- ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – तृतीय भाग मैं स्वामी दयानन्द सरस्वती संक्षेप से अपना जन्म चरित्र लिखता हूँ।। एक दिन सूर्योदय के होते ही मैं अपनी यात्रा पर चल पड़ा और पर्वत की उपत्यका में होता हुआ अलखनंदा नदी के तट पर जा पहुँचा।  मेरे …

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घर छोड़ कर क्यों भागना पड़ा-ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – द्वितीय भाग|

घर छोड़ कर क्यों भागना पड़ा –ऋषि दयानन्द का स्वलिखित जीवनवृत – द्वितीय भाग मैं स्वामी दयानन्द सरस्वती संक्षेप से अपना जन्म चरित्र लिखता हूँ।। जब माता पिता ने मुझे बुला के विवाह की तैयारी कर दी तब तक 21 इक्कीसवां वर्ष भी पूरा हो गया।  तब मैंने निश्चित जाना …

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