पुस्तक परिचय

18 वी सदी के औदीच्य साहित्यकार – ‘‘श्री लल्लूलाल जी‘‘  

– प्रकाश दुबे (41 विद्यानगर उज्जैन) पन्द्रहवी, सोलहवी सदी में गुजरात से विभिन्न समूहों में पलायित सहस्त्र औदीच्य, उत्तर, उत्तर पश्चिम दिशा में राजस्थान,मालवा के साथ पंजाब,उत्तर प्रदेश के शहर मथुरा,आगरा, अलीगढ ,फर्रूखाबाद,बनारस आदि शहरों में जाकर बस गये । ऐसा ही एक पंडित परिवार पुरोहित चैनसुख का आगरा में …

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ज्ञान की ज्योति जगाते समाज के पत्र एवं पत्रिकाऐं

मानव  ने कलम को हाथ में लिया ,बुध्दि ने कलम का साथ दिया! दोनों ने जब शब्दों को विचारों में बांधना शुरू किया तो कागज ने अपना दामन फैला कर उन्हे बटोरना प्रारम्भ कर दिया । विचारों की श्रृखंला,कहानी,कविता,आलेख,अभिलेख, समाचार,संस्मरण जैसी अनेक विधाओं में कागज पर उतरने लगी और समाज के …

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श्रीस्थल प्रकाश किंबा उदीच्य प्रकाश – औदीच्यों का इतिहास ग्रन्थ.

         श्रीस्थल प्रकाश किंवा (अथवा) उदीच्य प्रकाश जैसा की नाम से जाना जा सकता है, श्रीस्थल अर्थात सिद्धपुर में प्रकाशित होने वाले, उत्तर भारत से आए (उदीची) ब्राह्मणो का संस्कृत वर्णित इतिहास गाथा है। पौराणिक शैली में गुरु- शिष्य संबाद के रूप में दो खंडो में लिखा गया …

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