लेख-आलेख

अखिल भारतीय औदिच्य महासभा मध्य प्रदेश इकाई विषयक जानकारी

18 वी सदी के औदीच्य साहित्यकार – ‘‘श्री लल्लूलाल जी‘‘  

– प्रकाश दुबे (41 विद्यानगर उज्जैन) पन्द्रहवी, सोलहवी सदी में गुजरात से विभिन्न समूहों में पलायित सहस्त्र औदीच्य, उत्तर, उत्तर पश्चिम दिशा में राजस्थान,मालवा के साथ पंजाब,उत्तर प्रदेश के शहर मथुरा,आगरा, अलीगढ ,फर्रूखाबाद,बनारस आदि शहरों में जाकर बस गये । ऐसा ही एक पंडित परिवार पुरोहित चैनसुख का आगरा में …

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सास सुशील और बहु बदनाम क्यों ?

सास और बहू की जन्म कुण्डली मिलान करने की जनचर्चा होती है किन्तु आज तक कभी दोनों की कुण्डली को किसी ने मिलाया नहीं ? क्योंकि सास बहु संवाद तो बेटे की शादी के बाद ही प्रारम्भ होता है । पहले तो बहु सर्वगुण सम्पन्न नजर आती है। शादी के …

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परिचय से परिणय तक .गागर में सागर का समायोजन

विचार वैश्विक संपत्ति हैए जो उन्हे ग्राह्य करता हैए उसके व्दारा ही वे अभिव्यक्त होते हैं ! संस्कारों के विषय में भी आदिकाल से  निरन्तर विचार मंथन चलता आया है! संस्कारों के पीछे हमारे ऋषि मुनियों का उद्देश्य था एक प्रतिभा संपन्नएविवेकशील और श्रध्दालु मानव का निर्माण करनाए किन्तु पश्चिम …

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मुस्कराईए

एल्बर्ड हब्बर्ड की नेक सलाह है  मन पर संकल्प का बहुत बडा प्रभाव पडता है। आदमी  जैसा संकल्प लेता  है, वह पूरा होता है। मुस्कराहट से इस संसार  को खुशहाल बनाया जा सकता है। शब्दों के बजाय मुस्कराहट का ज्यादा प्रभाव पडता है। एक चीनी कहावत हैः- ‘‘ जिसके मुख …

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ज्ञान की ज्योति जगाते समाज के पत्र एवं पत्रिकाऐं

मानव  ने कलम को हाथ में लिया ,बुध्दि ने कलम का साथ दिया! दोनों ने जब शब्दों को विचारों में बांधना शुरू किया तो कागज ने अपना दामन फैला कर उन्हे बटोरना प्रारम्भ कर दिया । विचारों की श्रृखंला,कहानी,कविता,आलेख,अभिलेख, समाचार,संस्मरण जैसी अनेक विधाओं में कागज पर उतरने लगी और समाज के …

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