WordPress database error: [Got error 122 "Internal (unspecified) error in handler" from storage engine Aria]
SHOW FULL COLUMNS FROM `wp_options`

WordPress database error: [Got error 122 "Internal (unspecified) error in handler" from storage engine Aria]
SELECT t.*, tt.*, tr.object_id FROM wp_terms AS t INNER JOIN wp_term_taxonomy AS tt ON t.term_id = tt.term_id INNER JOIN wp_term_relationships AS tr ON tr.term_taxonomy_id = tt.term_taxonomy_id WHERE tt.taxonomy IN ('category', 'post_tag', 'post_format') AND tr.object_id IN (2161) ORDER BY t.name ASC

हवा में तैरते प्रश्नों के अटपटे उत्तर – AudichyaBandhu.org

WordPress database error: [Got error 122 "Internal (unspecified) error in handler" from storage engine Aria]
SHOW FULL COLUMNS FROM `wp_postmeta`

हवा में तैरते प्रश्नों के अटपटे उत्तर

WordPress database error: [Got error 122 "Internal (unspecified) error in handler" from storage engine Aria]
SELECT t.*, tt.*, tr.object_id FROM wp_terms AS t INNER JOIN wp_term_taxonomy AS tt ON t.term_id = tt.term_id INNER JOIN wp_term_relationships AS tr ON tr.term_taxonomy_id = tt.term_taxonomy_id WHERE tt.taxonomy IN ('category', 'post_tag', 'post_format') AND tr.object_id IN (2085, 2087, 2089, 2107) ORDER BY t.name ASC

WordPress database error: [Got error 122 "Internal (unspecified) error in handler" from storage engine Aria]
SELECT t.*, tt.*, tr.object_id FROM wp_terms AS t INNER JOIN wp_term_taxonomy AS tt ON t.term_id = tt.term_id INNER JOIN wp_term_relationships AS tr ON tr.term_taxonomy_id = tt.term_taxonomy_id WHERE tt.taxonomy IN ('category', 'post_tag', 'post_format') AND tr.object_id IN (2191, 2112) ORDER BY t.name ASC

दुनिया विशाल है यह तो ईश्वर का कमाल है किन्तु इस विशाल दुनिया में चर्चा के लिये इन्सान के पास बहुत से विषय हैं किन्तु आज हम यहाँ सामाजिक सरोकार के मुद्दो पर ही चर्चा को सीमित रखेगें । किसी भी गाँव,नगर या शहर में सामाजिक या व्यक्तिगत आयोजन हो , फुर्सत के क्षणों में बैठे बैठे उनमें से एक मेहमान अपनी वाणी की कमान से प्रश्नों के तीर छोडना शुरू करता हैं ? आशा करता है कि उसे उत्तर उसके विचार के अनुसार ही मिलेगा । उत्तर मीठा और कडवा दोनों ही जबान में आता है और उन पर लम्बी बहस छिड कर अन्त में सब हाथ मलते रह जाते हैं और अपने अमूल्य समय को नष्ट कर देते है।

प्रश्न आया समाज हमारे लिये कुछ नहीं करता ? समाज में रखा क्या है ? हम समाज की क्यों माने ? सामूहिक आयोजनों में बडे लोग अपनी भागीदारी नहीं निभाते ? विधवा और परित्यक्त महिलाओं की स्थिति पर कोई विचार ही नहीं करता । समाज में कुरीतियाँ बढती जा रही है उन्हे समाप्त करना चाहिए ? मृत्यु भोज बन्द होना चाहिये ? मामेरा प्रथा और दहेज प्रथा पर अंकुश लगना चाहिये ? दहेज में टू व्हीलर की जगह अब फोर व्हीलर दी जा रही है ? ऐसे कई समाज सुधार के प्रश्न उछलने लगते हैं वो तो जहाँ के तहाँ लोट पोट होते रहते है और फिर देश दुनिया की स्थिती पर चर्चा छिड जाती है । उसे बीच में ही छोड कर समाज के किसी लडके/लडकी या अन्य किसी व्यक्ति की अव्यावहारिक गतिविधियों की चर्चा मेें उलझ जाते हैं । इस प्रकार प्रश्नों का अंबार लग जाता है और उन पर हमको क्या करना चाहिये कुछ पता ही नहीं होता।

जब प्रश्न उछले हैं तो कोई न कोइ जवाब तो आयेगा ही । छोडो यार समाज वमाज की बात आजकल समाज है ही कहाँ ?दूसरा उत्तर आपने समाज के लिये क्या किया जो समाज आपकी फिकर करेगा । समाज के बिना कोई काम चल ही नहीं सकता । जन्म,जीवन और मौत तीनों समय समाज ही काम आता है। बीच में ही बात काट कर चैराहे के दूसरे रास्ते को पकड कर चलते चलते कहा सामाजिक आयोजनों में बडो बडों को ही मंच पर बिठाते है जो कहते कुछ और हैं तथा करते कुछ और हैं । सामूहिक विवाह आदि में गरीब लोग ही शामिल होते हैं बडे लोग तो ठाठ से अपने विवाह अलग से करते हैं ।

श्री राल्फ वाल्डो इमर्सन ने कहा है कि-वहाँ न जाए जहां राह ले जाए,वहां जाएं जहां राह न हो और वहां अपनी छाप छोड आएं । आज से आपके सामने अपने कत्र्तव्यों को समाज हित में निभाने के लिये संभावनाओं का आकाश छिपा हुआ है। किसान खेत में ढेर सारे बीज बोता है। इन बीजों में से कुछ अंकुरित हो पाते हैं और कुछ मिट्टी में ही दबे रह जाते है। जो दबे रह जाते हैं ,दुनिया उन्हे भूल जाती है पर जो जतन के साथ मिट्टी के बाहर निकलते हैं और वे अपनी पूरी उर्जा के साथ पल्लवित हो उठते हैं । समाज की सर्वांगीण उन्नति जिसमें सेवा,संस्कार,शिक्षा और स्वास्थ्य के निर्माण के चार स्तम्भ के सहारे आगे का निर्माण करना है। बस उन संभावनाओं को टटोलने की आदत विकसित करना होगी जिनके माध्यम से हम समाज की नब्ज को टटोल कर उसका सही इलाज कर सकें ।

आज से अपना ब्रेन वाश करके चलना है। पिछले अच्छे कार्यों की यादों को मन में जगह देकर कडुवाहट को बाहर ढकेलना होगा। भविष्य की संभावनाओं का प्लान तैयार कर समाज के सामने रख कर उसके विचारों के अनुसार इसमें संशोधन कर फिर काम की शुरूवाद करें । आगे कठिनाईयां, विरोध, सुझाव जैसे अनेक झंझावातों का सामना भी करना होगा किन्तु इन्हे अपना समझ इनमें से भी अच्छाईयों को समेट लो और बिना विचलित हुए अपनी यात्रा की मंजिल पर बढो । आज आपके हाथ में है,समाज आपके साथ में है,बीता कल आपका इतिहास बनेगा, कल का युवा उसको पढेगा और उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी देगा। अब आप आज से समाज की धरोहर हैं । एक नया इतिहास रचें । करना आपको है, सहना आपको है।

उद्धव जोशी, उज्जैन

About bandhu

Chetan Joshi - Administrator

WordPress database error: [Got error 122 "Internal (unspecified) error in handler" from storage engine Aria]
SELECT t.*, tt.*, tr.object_id FROM wp_terms AS t INNER JOIN wp_term_taxonomy AS tt ON t.term_id = tt.term_id INNER JOIN wp_term_relationships AS tr ON tr.term_taxonomy_id = tt.term_taxonomy_id WHERE tt.taxonomy IN ('category', 'post_tag', 'post_format') AND tr.object_id IN (2075) ORDER BY t.name ASC

अवश्य देखें

 मन को कैसे मनावें

आम धारणा है कि मन मानता ही नहीं है? मन इतना बेलगाम क्यों है? मन …