मुस्कराईए

एल्बर्ड हब्बर्ड की नेक सलाह है : मन पर संकल्प का बहुत बडा प्रभाव पडता है! आदमी  जैसा संकल्प लेता  है, वह पूरा होता है। मुस्कराहट से इस संसार को खुशहाल बनाया जा सकता है। शब्दों के बजाय मुस्कराहट का ज्यादा प्रभाव पडता है।

एक चीनी कहावत है, जिसके मुख पर मुस्कराहट नहीं है, उसे दूकान नहीं खोलना चाहिये। चारो तरफ मुस्कराहट बिखेरिये। मुस्कराहट में कुछ खर्च नहीं होता, लेकिन लाभ बहुत होता है। मुस्कराहट एक  क्षण में उत्पन्न होती है किन्तु अपनी स्मृति सदा के लिये छोड जाती है। मुस्कराहट प्रकृति का वरदान है। वह थके हुवों को विश्राम  देती है और निराशा भरे मन में आशा का संचार करती है। मुस्कराहट न तो खरीदी जा सकती है और न ही उधार मिलती है। मुस्कराहट व्यक्तिगत संपत्ति है, इसे व्यक्ति मुफ्त में बिखेरता है। कहा गया है कि ‘‘मुस्कानों का बैंक जहाँ होता है, सफलता का चेक वहीं से भुनाया जा सकता है।’’ मुस्कान से मन की कली कली खिल जाती है। प्रसन्नता पूर्ण विचार ही हमारे शरीर को ताजगी तथा उर्जा प्रदान करते हैं। प्रसन्नता के कारण ही हमारा शरीर, मन और आत्मा संगठित होकर एक ताकत के रूप में उभरते हैं। प्रसन्नता ईश्वर की अनमोल नियामत है।  डॅा.ए.जे.एण्डरसन के कहा है कि-स्वास्थ्य को कायम रखने तथा रोग  को दूर करने में प्रफुल्लता का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रसन्नता का प्रभाव शरीर पर औषधी के समान होता है। मन के अन्तर से उत्पन्न होने वाले भाव मनुष्य को अनेक बीमारीयों से दूर रखते है। प्रत्येक अनुकूल तथा प्रतिकूल परिस्थितियों को प्रसन्न मन से वरण करना चाहिये।

किसी  कवि की  कल्पना है- फूल बन कर मुस्कराना जिन्दगी है। मुस्कराकर गम भुलाना जिन्दगी है। जीतकर खुश हो गए तो  क्या हुआ, हार में भी मुस्कराना जिन्दगी है। प्रकृति का आकर्षण देखिये उगते सूरज की सिंदूरी आभा,उडती चिडियों की चहचहाहट, हवा के गुलाबी झोंके, पेडों क। डालियों पर पत्तियों का संगीत, धरती का लावण्य, मन को आल्हादित कर देता है। हृदय को ताकत देने में प्रसन्नता लुब्रीकेन्ट का काम करती है। प्रसन्न मस्तिष्क मे क्रियाशील विचार जन्म लेते हैं।

लिंकन से उनकी सफलता का रहस्य जानने पर उनका उत्तर था कि ‘‘मैं अपने व्यक्तित्व को सदैव प्रफुल्ल बनाये रखता हूँ। इसका आधार है मानसिक संतुलन । मैं कभी भयानक विचारोे को अपने पास नहीं फटकने देता हूँ। मैं आशा, उत्साह,प्रगति के साथ सदा रहता हूँ। यही मेरी सफलता का राज हैै। इस सिध्दान्त को अपनाकर प्रत्येक मनुष्य अपना जीवन सफल बना सकता है।

हम आज ही प्रण करें की जिस तरह निर्मल पावन सूर्य रश्मियों के उदय के साथ ही कलियाँ फूल बन कर खिलखिलाती है,पंछी चहचहाने लगते हैं । वैसे ही आत्मीयता भरी प्रफुल्लित मुस्कान से प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक उर्जा से सराबोर करेगें । जिनसे भी मिलेगें अमिट छाप छोड जाएगें।

श्री प्रफुल्लचन्द्र राय ने लिखा है-  जीवन के दुःख से घबराकर अपने मन को क्यों मुरझायें। धुप छांव तो प्रतिपल,प्रतिक्षण,आओ हम केवल मुस्कराऐं। जहाँ सकारात्मक विचारों की ही महत्ता हैं वहाँ नकारात्मक विचारों के लिये कोई भी खाली जगह नहीं होती जहाँ वे रह सकें । मुस्कान निशुल्क मिलती है, कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं, वह भी आपके मन मन्दिर से। मुस्कराइये, मुस्कराइये ,मुस्कराइये ।

उद्धव जोशी, उज्जैन

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